Naseem azmi
Sunday, October 23, 2022
aur kitni barahnagi hogi _Naseem Azmi
شرم سے آنکھ بھی نہیں اٹھتی
اور کتنی برہنگی ہوگی
ہم نے سوچا نہ تھا کبھی مولا
ایسی اکیسویں صدی ہوگی
शर्म से आंख भी नहीं उठती
और कितनी बरहनगी होगी
हमने सोचा न था कभी मौला
ऐसी इक्कीसवीं सदी होगी
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Dil me khizan hai aankhon me barsat ka mizaj
दिल में ख़िज़ाँ है आँखों में बरसात का मिज़ाजम त पूछ मेरी तल्ख़ी-ए-हालात का मिज़ाज शायद के कर रहे हैं वो रिमझिम रिधम पे रक़्स बदला हुआ है शह्र में...
samjh raha tha mai pahle ki kaam bolta hai
समझ रहा था मैं पहले के काम बोलता है मगर ये झूट है, अब सिर्फ़ नाम बोलता है ख़मूश होके सुना करते हैं जहाँ वाले ज़ुबाँ से अपनी जो रब का कलाम बोल...